मां ने कहा, शरीफ इन्सान बनो,
बुराई से दूर रहो,क्यूंकि,
हम लड़ नहीं सकते,
टीचर ने कहा,अच्छे मार्क्स लाओ वर्ना,
जिंदगी से तुम लड़ नहीं सकते,
सरेआम होती कुत्सित मर्दानगी,
को देख के दोस्त बोले,
हमसे क्या मतलब,ऐसों से दूर रहो क्यूंकि,
ऐसों से हम लड़ नहीं सकते,
पापा ने कहा,अच्छी नौकरी ढूंढो क्यूंकि अब,
हम अपनी गरीबी से लड़ नहीं सकते,
नौकरी मिली, असंतुष्ट मन ने कहा,
अब होगी लड़ाई,
बॉस ने कहा, जुबान सिल लो,
अपने मालिकों से,
तुम लड़ नहीं सकते,
अफसर बनने का ख्वाब था,नजदीक से देखा,
तो नफरत हो गयी,इस कमजोर शब्द से भी,
सोचा इस से तो होके रहेगी लड़ाई,पर,
वरिष्ठों ने कहा,तुम लड़ो,
हम लड़ नहीं सकते,
दिल ने कहा,पूरा नहीं तो थोड़ा ही परिवर्तन,
नेताओं से लड़ते हैं,पता चला,
मेरा लाला है उनका गुलाम,यानि,
हुक्मरानों के,
हिकमतगारों से लड़ नहीं सकते,
फिर खुद से लड़ने का फैसला किया,और,
जीत गया,
क्यूँ कहते हो कि,
हम लड़ नहीं सकते,
बोलो पुरान को मानोगे या विज्ञानं को,
"लड़ नहीं सकते" शब्द के साथ,
दोनों की पटरी पर,
तुम चल नहीं सकते,क्यूंकि,
डार्विन कहता है, योग्यतम की उत्तरजीविता,
और,
पुरान का प्रमान है,जो लड़ सका,
वही तो महान है,
गरीबों की छिनती रोटी देख कर,
तुम कहते हो कि,
तुम लड़ नहीं सकते,तो,
तुम्हारे मुंह के निवाले,हलक से निकल लिए जायेंगे,
मुझे पता है,तब भी तुम कहोगे कि, छोड़ो,
हम लड़ नहीं सकते,
तुम्हारी बहन-बेटियां सरेआम, सड़कों पर,
कुत्सित मर्दानगी का शिकार होंगी,
क्या तब भी तुम कहोगे कि,
हम लड़ नहीं सकते,
जब तुम्हे पैदा करने वाले की गाल पर,
शराफत का ईनाम मिलेगा,
तो भी कहोगे कि,
तुम लड़ नहीं सकते,
तो,
मुझे रंज है और ख़ुशी भी कि,
मै तुम सा न बन सका, क्यूंकि,
मुझे लड़ना है, मै लड़ सकता हूँ, लड़ता हूँ,
मुझे है तुम लोगो के,
कारवां का इन्तजार.
Monday, March 22, 2010
Sunday, March 21, 2010
मोहरा
क्यूँ लड़ता है आदमी,
क्या कभी जीतता है आदमी,
सिर्फ हारता है आदमी,
तो क्यूँ लड़ता है आदमी,
खेल तेरा,
खेल के नियम भी तेरे,
खिलाड़ी भी तू,
फिर क्यूँ मोहरा बनता है आदमी,
तू मदारी तू खिलाड़ी,
सिर्फ तमाशा बनता है आदमी,
पर जब तेरे डोर को,
काटता है आदमी,
तो तुझे भी,
लगाम पहनाता है आदमी,
फिर तू बदल देता है,
खेल के नियम,
क्यूंकि,
खेल तेरा,
खेल के नियम भी तेरे,
खिलाड़ी भी तू,
और,
फिर मोहरा बनता है आदमी.
क्या कभी जीतता है आदमी,
सिर्फ हारता है आदमी,
तो क्यूँ लड़ता है आदमी,
खेल तेरा,
खेल के नियम भी तेरे,
खिलाड़ी भी तू,
फिर क्यूँ मोहरा बनता है आदमी,
तू मदारी तू खिलाड़ी,
सिर्फ तमाशा बनता है आदमी,
पर जब तेरे डोर को,
काटता है आदमी,
तो तुझे भी,
लगाम पहनाता है आदमी,
फिर तू बदल देता है,
खेल के नियम,
क्यूंकि,
खेल तेरा,
खेल के नियम भी तेरे,
खिलाड़ी भी तू,
और,
फिर मोहरा बनता है आदमी.
Sunday, March 14, 2010
मां
याद आता है मां का वो रोना,
वो सुबकना,
जब मेरा संघर्ष ढूंढता था,
स्थायित्व का एक अदद कोना,
उसके आंसुओं का,
मजबूरी के यौगिकों से घुला होना,
जो पिघला सकता था,
परमेश्वर का भी सीना,
उसे रंज था,
कि वो न लायी थी,
सामने वाले प्रोफ़ेसर साहब ने,
जो दिया था,
अपने बेटे को खिलौना,
मेरे अनुतीर्णता को मानती थी वो,
अपनी बेचार गरीबी का होना,
मैं आज जो भी हूँ,
उसके संस्कारों की बदौलत हूँ,
मां तू बहुत अमीर थी,
तब भी आज भी,
मुझे नहीं भूलता तेरा वो रोना,
इसलिए मां तुझे शुक्रिया नहीं,
कह पता मैं,
काश तेरे जैसा मैं भी होता,
और जान लेता,
तेरा राज-ए-हँसना राज-ए-रोना,
मां तू तो बिना कहे जान लेती है,
क्यूँ है मेरा हँसना क्यूँ है मेरा रोना,
मां तू अब तो नहीं रोती,
बता दे मुझे,
मुझमे है अब भी बचपना
वो सुबकना,
जब मेरा संघर्ष ढूंढता था,
स्थायित्व का एक अदद कोना,
उसके आंसुओं का,
मजबूरी के यौगिकों से घुला होना,
जो पिघला सकता था,
परमेश्वर का भी सीना,
उसे रंज था,
कि वो न लायी थी,
सामने वाले प्रोफ़ेसर साहब ने,
जो दिया था,
अपने बेटे को खिलौना,
मेरे अनुतीर्णता को मानती थी वो,
अपनी बेचार गरीबी का होना,
मैं आज जो भी हूँ,
उसके संस्कारों की बदौलत हूँ,
मां तू बहुत अमीर थी,
तब भी आज भी,
मुझे नहीं भूलता तेरा वो रोना,
इसलिए मां तुझे शुक्रिया नहीं,
कह पता मैं,
काश तेरे जैसा मैं भी होता,
और जान लेता,
तेरा राज-ए-हँसना राज-ए-रोना,
मां तू तो बिना कहे जान लेती है,
क्यूँ है मेरा हँसना क्यूँ है मेरा रोना,
मां तू अब तो नहीं रोती,
बता दे मुझे,
मुझमे है अब भी बचपना
ख्वाबों की मंजिल
कुछ अजीब सी चाहत है मेरी,
जो पतझड़ देखे हैं,
उन पत्तियों की शपथ है मेरी,
दिल भी यही चाहता है,
और यही है मेरे इबादत की ख्वाहिश,
मेरे उम्र से हो छोटी,
रास्तों की पैमाइश,
हाँ मेरे पास वक़्त नहीं,
कि मैं तेरे कालचक्र के साथ चलूँ,
मुझे डर है कि मेरी धडकनें,
न यूं ही सफ़र कर लें पूरी,
ये जुल्म न कर मेरे साथ ऐ खुदा,
कि नचा दे मुझको कह के,
कि ये है मौत की धुरी,
बस ख्याल रखना कि,
वक़्त नहीं दिया है तूने,
कहीं रास्ते पर ही न रह जाय,
ये ख्वाबों की मंजिल अधूरी.
जो पतझड़ देखे हैं,
उन पत्तियों की शपथ है मेरी,
दिल भी यही चाहता है,
और यही है मेरे इबादत की ख्वाहिश,
मेरे उम्र से हो छोटी,
रास्तों की पैमाइश,
हाँ मेरे पास वक़्त नहीं,
कि मैं तेरे कालचक्र के साथ चलूँ,
मुझे डर है कि मेरी धडकनें,
न यूं ही सफ़र कर लें पूरी,
ये जुल्म न कर मेरे साथ ऐ खुदा,
कि नचा दे मुझको कह के,
कि ये है मौत की धुरी,
बस ख्याल रखना कि,
वक़्त नहीं दिया है तूने,
कहीं रास्ते पर ही न रह जाय,
ये ख्वाबों की मंजिल अधूरी.
Sunday, March 7, 2010
महिला दिवस
क्या आज मेरे वजूद का पैमाना बताओगे,
जो है सृष्टीकार की भी मां,
उसके लिए शक्ति पूजा,
और मेरे लिए दहेज़ की बेदी सजाओगे,
जिसे कहते हो तुम मां दुर्गा मां काली,
मैं भी उसका अंश हूँ,
तुम कब समझ पाओगे,
तुम्हे नौ महीने अपना खून पिलाया,
कभी बेटी कभी बहन बनकर,
तुम्हारे जख्मों को सहलाया,
यकीं नहीं था कि तुम,
बस औरत का फर्ज कहकर,
यूं ही भूल जाओगे,
जानवर गर समझो मुझे,
तो वो मैं थी,
जिसके दूध के भरोसे,
तुम अपनी औलादों को छोड़ गए,
और फिर छोड़ जाओगे,
मैं तो बेटी हूँ तुम्हारी,
फिर क्यों मेरे हिस्से में,
तुम सिर्फ नफरत लुटाओगे,
फिर भी मुझे कोई गिला नहीं,
पर डर है कि,
इक दिन इस कायनात में मेरे बिना,
तुम अकेले रह जाओगे.
जो है सृष्टीकार की भी मां,
उसके लिए शक्ति पूजा,
और मेरे लिए दहेज़ की बेदी सजाओगे,
जिसे कहते हो तुम मां दुर्गा मां काली,
मैं भी उसका अंश हूँ,
तुम कब समझ पाओगे,
तुम्हे नौ महीने अपना खून पिलाया,
कभी बेटी कभी बहन बनकर,
तुम्हारे जख्मों को सहलाया,
यकीं नहीं था कि तुम,
बस औरत का फर्ज कहकर,
यूं ही भूल जाओगे,
जानवर गर समझो मुझे,
तो वो मैं थी,
जिसके दूध के भरोसे,
तुम अपनी औलादों को छोड़ गए,
और फिर छोड़ जाओगे,
मैं तो बेटी हूँ तुम्हारी,
फिर क्यों मेरे हिस्से में,
तुम सिर्फ नफरत लुटाओगे,
फिर भी मुझे कोई गिला नहीं,
पर डर है कि,
इक दिन इस कायनात में मेरे बिना,
तुम अकेले रह जाओगे.
Wednesday, March 3, 2010
बुरा न मानों होली है....
मैं तुम्हारा पड़ोसी, खाली मेरी झोली है,
तुम बुरा न मानो होली है,
मुझसे कहते हैं कुछ बागी,
इस बेबराबर कुश्ती का जवाब गोली है,
पर मैं कहता आया कि बुरा न मानो होली है,
मेरे पेट की चमड़ी मेरे रीढ़ को छू ली है,
फिर भी दिल कहता है बुरा न मानो होली है,
सोचता है मेरा भी मन कभी कभी,
क्या बारूद ने ही हुक्मरानों की कान खोली है,
तब वो कहते हैं, नक्सली है दोस्तों,
बुरा न मानो होली है,
सुना है बाजार ने उम्मीदों की राह खोली है,
तब क्यूँ खाली मेरी झोली है,
पर मेरे प्यारे भारत,
तुम बुरा न मानो होली है.
तुम बुरा न मानो होली है,
मुझसे कहते हैं कुछ बागी,
इस बेबराबर कुश्ती का जवाब गोली है,
पर मैं कहता आया कि बुरा न मानो होली है,
मेरे पेट की चमड़ी मेरे रीढ़ को छू ली है,
फिर भी दिल कहता है बुरा न मानो होली है,
सोचता है मेरा भी मन कभी कभी,
क्या बारूद ने ही हुक्मरानों की कान खोली है,
तब वो कहते हैं, नक्सली है दोस्तों,
बुरा न मानो होली है,
सुना है बाजार ने उम्मीदों की राह खोली है,
तब क्यूँ खाली मेरी झोली है,
पर मेरे प्यारे भारत,
तुम बुरा न मानो होली है.
Wednesday, November 12, 2008
प्रोफेशनल के मायने
आप किसी भी फील्ड से जूड़े हों। आपको दो शब्दों की एक लाइन अक्सर पेशे से जूड़े हुए अपने साथी और बॉस से सुनने को मिलती होगी, "Be Professional" आखिर प्रोफेशनल होना किस चिडीया का नाम है। हम सब जब तक अपने अपने पेशे से नहीं जूड़े थे तब तक तो यही जानते थे कि प्रोफेशनल होना मतलब अपने काम के प्रति ईमानदार होना. काम के समय सिर्फ काम के बारे में सोचना. एक कहानी भी बचपन में पढ़ी थी. सरदार वल्लभ भाई पटेल एक बार कोर्ट में किसी खास मुक़दमे की बहस में व्यस्त थे. उसी बीच उनके पास एक पत्र आया. उन्होंने पत्र पढ़कर जेब में रख लिया और अपना काम जारी रखा. बहस ख़त्म होने के बाद उन्होंने अपने दोस्तों से बोला कि उन्हें अभी तुंरत वहां से जाना होगा. क्यूँ कि उनकी बीवी का देहांत हो गया था. यह सूचना उन्हें कोर्ट में बहस के दौरान उसी पत्र से मिली थी. फिर भी उन्होंने अपना काम जारी रखा. मैं सोचता था कि प्रोफेशनलिज्म का इससे बेहतरीन उदाहरण हो ही नहीं सकता. पर मैं गलत था, कम से कम उस परिप्रेक्ष्य में जिस में आज प्रोफेशनलिज्म की परिभाषा दी जाती है. पत्रकारिता के पेशे से आप जुड़े हैं तो प्रोफेशनलिज्म का मतलब है कि अगर किसी का बेटा मरा है और मां-बाप के आंसू सूख चुके हैं ऐसे में आपको उन्हें कुरेद कुरेद कर रुलाना है रोते हुए बाईट लाना अच्छे प्रोफेशनालिस्ट की निशानी है. अगर आप किसी थाने में हैं और पति-पत्नी का झगड़ा पुलिस निपटा ले जाती है और पत्नी पति के कुछ एक्शन विजुअल नहीं मिल पाते तो आप कत्तई प्रोफेशनल नहीं हैं. किसी शादी में थोड़े बहुत विवाद की सूचना मिलने पर अगर आप पहुंचे और बारात बिना पिटे वापिस चली गयी तो आप बेकार हैं. क्यूँ कि इन बातों की चिंता प्रोफेशनल लोग नहीं करते कि बेइज्जत हुए लोग खुदखुशी करेंगे या जीवन में उनके लड़के-लड़की की शादी नहीं हो पायेगी. ऐसी तमाम उपलब्धियां आपको बार बार हासिल करनी पड़ेंगी अगर आप प्रोफेशनल कहलाना पसंद करते हैं. फिल्मों में कैसे प्रोफेशनल कहलाते हैं मुझे बहुत सटीक अंदाजा तो नहीं मगर फिल्मों को देखकर ही अंदाजा लगता है कि वहां भी किसी स्ट्रगलर लड़की को सपने दिखाकर उसका शारीरिक शोषण का विरोध करने वाले को कत्तई प्रोफेशनल नहीं कहा जाता. अगर लड़की अपना हक मांगती है तो "be Professional" कहकर शांत कराया जाता है. बात करते हैं मार्केटिंग और फाइनेंस के क्षेत्रों की. अगर आप अपने किसी ब्रोकर को शेयर में इन्वेस्ट करने के लिए पैसे दे रहे हैं तो थोडा सावधान हो जाइये. अगर आपका ब्रोकर या एजेंट प्रोफेशनल हुआ तो आपके पैसे को वो किसी शेयर में न निवेश करके आपका इंश्योरेंस कर देगा. मात्र अपना टारगेट पूरा करने के लिए. और ऐसा करने की सलाह उसका बॉस देता है, Be Professional कहते हुए. इस पंच लाइन का प्रयोग करने वाले ज्यादातर लोग एक और पंच लाइन बार बार प्रयोग में लाते हैं. "ufff your bloddy principles". आप सोच लीजिये अगर आप प्रोफेशनल हैं तो अपने ब्लडी प्रिंसिपल्स को तो भूल ही जाइये.
ऐसे तमाम क्षेत्र हैं जहाँ प्रोफेशनल का वास्तविक अर्थ है झूठ, मक्कारी, वादाखिलाफी जैसे गुणों से लैस होना. मगर चिंता मत कीजिये ये सारे गुण आपको तरक्की दिलाने में आवश्यक हैं. इन गुणों को अब बुरी नजर से नहीं देखा जाता.
ऐसे तमाम क्षेत्र हैं जहाँ प्रोफेशनल का वास्तविक अर्थ है झूठ, मक्कारी, वादाखिलाफी जैसे गुणों से लैस होना. मगर चिंता मत कीजिये ये सारे गुण आपको तरक्की दिलाने में आवश्यक हैं. इन गुणों को अब बुरी नजर से नहीं देखा जाता.
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